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मोबाईल फोन का उपयोग

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मोबाइल फ़ोन से होने वाले लाभ Mobile Phone Se Hone Wale Labh :  मोबाइल हमारे कई कामो में बहुत काम आती है इसीलिए हम आपको मोबाइल के फायदों के बारे में भी जानकारी देते है जिससे की आप काफी कुछ जान सकते है जाने क्या है इसके लाभ : फ़ोन की मदद से आप एक स्थान पर बैठे-2 किसी भी व्यक्ति से संपर्क कर सकते है और उससे बाते कर सकते है | जब हम बोर हो रहे हो रहे हो तो अपने मनोरंजन के लिए मोबाइल के अनुसार दी हुई सुविधाएं जैसे गाना सुनना, गेम खेलना, वीडियो देखना ऐसे फायदे उठा सकते है | आजकल के सभी फ़ोन्स में कैमरे की सुविधा आ रही है इसीलिए इससे हम अपने यादगार पल इसमें क्लिक कर सकते है और हम अपनी फोटो भी क्लिक कर सकते है | ब्लूटूथ की जरिये हम अपनी मोबाइल की मीडिया को अन्य मोबाइल में तुरंत भेज सकते है इससे समय की बचत होती है वरना पहले हमें कंप्यूटर की मदद से फाइल्स ट्रांसफरिंग करनी पड़ती थी | मोबाइल फ़ोन में बात करने के अलावा अतिरिक्त सुविधाओं के रूप में अलार्म, कैलेंडर, कैलकुलेटर, टाइमर और नोट बुक की सुविधा होती है जिनका फायदा हम उठा सकते है | स्मार्टफोन में आप अपनी लोकेशन खुद ट्रैक कर सकते हो औ...

स्वस्थ पर्यावरण

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स्वस्थ जीवनशैली में मददगार जब सेहत का सवाल आता है तो जरूरी है कि घर में साफ हवा आती-जाती हो. वह प्रदूषण फैलाने वाले कैमिकल से मुक्त हो. ग्रीन होम में आपको स्वस्थ जीवनशैली को बनाए रखने में मदद मिलती है. पौधों और सौर ऊर्जा से घर के अंदर का वातावरण शुद्ध रहता है।

गुरु को भगवान क्यों मानना चाहिए

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गुरु को भगवान इस लिए मानना चाहिए कि क्योंकि परमात्मा ही तत्व ज्ञान कराने के लिए सच्चेगरू का रूप धारण करके अपने परमधाम जिसे अमरलों भी कहते है जिसका वास्तविक नाम सतलोक है जहां से आते है जहां जाने के बाद जन्म मृत्यु नहीं होती है। वहां से चलकर परमात्मा स्वयं आते हैं और  पूर्ण गुरु तत्वदर्शी संत का  रोल कर अपने पुण्य आत्माओं को तत्वज्ञान कराते हैंऔर सत भक्ति देकर मोक्ष कराते है। क्योंकि आध्यात्मिक ज्ञान को बताना हम जीव की बस की बात नहीं है उसके लिए अध्यात्मिक टीचर की आवश्यकता होती है क्योंकि वेद शास्त्र हमारे आध्यात्मिक ज्ञान का सिलेबस है इसको परमात्मा ही खोल कर बता सकता है। इसलिए पूर्ण गुरु का रूप धारण करके स्वयं परमात्मा आते हैं। इसलिए गुरु को परमात्मा के समान माना गया है।   💫यदि स्वयं परमात्मा और गुरु हमारे सामने आकर खड़े हो जाए तो हमें पहले किस को प्रणाम अथवा दंडवत प्रणाम करनी चाहिए??? इसका उत्तर....  परमात्मा की वाणी है कि.... गुरु गोविंद दोनों,खड़े किसके लागू पाउ। बलिहारी गुरु,आपने गोविंद दियो बताए।। यदि हमारे सामने परमात्मा और पूर्ण गुरु आकर खड़ा हो जाए तो ...

एक प्राकृतिक आपदा एक प्राकृतिक जोखिम

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  ज्वालामुखी विस्फोट  (volcanic eruption),  भूकंप  जो कि मानव गतिविधियों को प्रभावित करता है। मानव दुर्बलताओं को उचित योजना और  आपातकालीन प्रबंधन  (emergency management) का आभाव और बढ़ा देता है, जिसकी वजह से आर्थिक, मानवीय और पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है। परिणाम स्वरुप होने वाली हानि निर्भर करती है जनसँख्या की आपदा को बढ़ावा देने या विरोध करने की क्षमता पर, अर्थात उनके लचीलेपन पर। [1]  ये समझ केंद्रित है इस विचार में: "जब जोखिम और  दुर्बलता  (vulnerability) का मिलन होता है तब दुर्घटनाएं घटती हैं". [2]  जिन इलाकों में दुर्बलताएं निहित न हों वहां पर एक पर भी एक प्राकृतिक आपदा में तब्दील नहीं हो सकता है, उदहारण स्वरुप, निर्जन प्रदेश में एक प्रबल भूकंप का आना-बाना मानव की भागीदारी के घटनाएँ अपने आप जोखिम या आपदा नहीं बनती हैं, इसके फलस्वरूप  प्राकृतिक  शब्द को विवादित बताया गया है ।

पर्यावरण में होने वाले नुकसान केसे बचे।

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पर्यावरण में मुख्य रूप से पेड़ पौधे,जीव जंतु, पशु-पक्षी जल वायु मिट्टी मनुष्य आदि शामिल होते हैं। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर विकास किया जाए तो वह सतत विकास न होकर भावी पीढ़ियों के लिए घातक बन जाता है। जैसे जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण ,मिट्टी प्रदूषण ,ध्वनि प्रदूषण ,मरुस्थलीकरण औद्योगीकरण, नगरीकरण ,वन विनाश करने ग्लोबल वार्मिंग मिट्टी में बढ़ती लवणता क्षारीयता की मात्रा ओजोन परत का क्षरण अम्लीय वर्षा आदि से बचने के लिए अथक प्रयास किए जाने चाहिए। लेकिन ऐसे समाप्त नहीं हो सकता इसे केवल पूर्ण परमात्मा का तत्वज्ञान अमृतवाणी पूरे प्रकृति में फैलने से यह पर्यावरण में होने वाले नुकसान अपने आप समाप्त हो जाते हैं।

हम नास्तिक अच्छे या बुरे

हम नास्तिक अच्छे होते हैं या बुरे, नैतिक होते हैं या अनैतिक, मानवता में यकीन रखते हैं या नहीं आदि पर बात करें, उससे पहले नास्तिक किसे कहते हैं, स्पस्ट करने का प्रयास करते हैं। नास्तिक के बारे में भारत में कई प्रकार की संकल्पनायें अथवा समझ लोगों में है –एक संकल्पना के अनुसार, नास्तिक शब्द दो शब्दों के मेल से बना है – नास्ति + क। 'नास्ति' का अर्थ है कि 'जो नहीं है' और 'क' का अर्थ है 'यकीन करने वाला'। इस तरह से इसका अर्थ हुआ जो यह मानता है कि नहीं है अथवा स्तित्व नहीं है। यहाँ अभिप्राय है, वैसे लोग जो मानते हैं कि इस संसार को चलाने वाला कोई नहीं हैं।  कोई ईश्वर, कोई देवी-देवता आदि नहीं हैं। कोई भी अलौलिक शक्ति नहीं है, जो सृष्टि करती है। उसका सञ्चालन और नियंत्रण करती है।  चूँकि नास्तिक ईश्वर में यकीन नहीं करते, इसलिए इन्हें प्रायः अनीश्वरवादी भी कह दिया जाता है। लेकिन यह नहीं हो सकता है क्योंकि सृष्टि की रचना परमात्मा के अलावा कोई और नहीं कर सकता है क्योंकि सृष्टि की रचना परमात्मा ने की ओर सभी मनुष्यों जीव-जंतु पेड़-पौधे आदि को परमात्मा ने बनाया उसका वेदो...

मांस खाना परमेश्वर का आदेश नहीं !

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मांस खाना परमेश्वर का आदेश नहीं ! पवित्र बाईबल (उत्पत्ति ग्रन्थ 1:29) प्रभु ने मनुष्यों के खाने के लिए जितने बीज वाले छोटे पेड़ तथा जितने पेड़ों में बीज वाले फल होते हैं वे भोजन के लिए प्रदान किए हैं, माँस खाना नहीं कहा है।