हम नास्तिक अच्छे या बुरे

हम नास्तिक अच्छे होते हैं या बुरे, नैतिक होते हैं या अनैतिक, मानवता में यकीन रखते हैं या नहीं आदि पर बात करें, उससे पहले नास्तिक किसे कहते हैं, स्पस्ट करने का प्रयास करते हैं। नास्तिक के बारे में भारत में कई प्रकार की संकल्पनायें अथवा समझ लोगों में है –एक संकल्पना के अनुसार, नास्तिक शब्द दो शब्दों के मेल से बना है – नास्ति + क। 'नास्ति' का अर्थ है कि 'जो नहीं है' और 'क' का अर्थ है 'यकीन करने वाला'। इस तरह से इसका अर्थ हुआ जो यह मानता है कि नहीं है अथवा स्तित्व नहीं है।
यहाँ अभिप्राय है, वैसे लोग जो मानते हैं कि इस संसार को चलाने वाला कोई नहीं हैं।  कोई ईश्वर, कोई देवी-देवता आदि नहीं हैं। कोई भी अलौलिक शक्ति नहीं है, जो सृष्टि करती है। उसका सञ्चालन और नियंत्रण करती है।  चूँकि नास्तिक ईश्वर में यकीन नहीं करते, इसलिए इन्हें प्रायः अनीश्वरवादी भी कह दिया जाता है। लेकिन यह नहीं हो सकता है क्योंकि सृष्टि की रचना परमात्मा के अलावा कोई और नहीं कर सकता है क्योंकि सृष्टि की रचना परमात्मा ने की ओर सभी मनुष्यों जीव-जंतु पेड़-पौधे आदि को परमात्मा ने बनाया उसका वेदों में भी प्रमाण है इसकी जानकारी हमें किसी तत्वदर्शी संत से मिलेगी क्योंकि वेदों में प्रमाण है। क्योंकि संकट आने पर परमात्मा को याद किया जाता है। इसका मतलब परमात्मा है तभी तो परमात्मा को याद किया जाता है जैसे उदाहरण के लिए चीन जो बिल्कुल नास्तिक हो गया था तो अब संकट आने पर भगवान को याद कर रहे हैं जब की क्यों भगवान को मानते ही नहीं थे इसलिए परमात्मा किं सही जानकारी किसी तत्वदर्शी संत से लेकर हमें उसकी भक्ति करनी चाहिए जो हमारे ऊपर संकट नहीं आने दे।

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