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एक प्राकृतिक आपदा एक प्राकृतिक जोखिम

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  ज्वालामुखी विस्फोट  (volcanic eruption),  भूकंप  जो कि मानव गतिविधियों को प्रभावित करता है। मानव दुर्बलताओं को उचित योजना और  आपातकालीन प्रबंधन  (emergency management) का आभाव और बढ़ा देता है, जिसकी वजह से आर्थिक, मानवीय और पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है। परिणाम स्वरुप होने वाली हानि निर्भर करती है जनसँख्या की आपदा को बढ़ावा देने या विरोध करने की क्षमता पर, अर्थात उनके लचीलेपन पर। [1]  ये समझ केंद्रित है इस विचार में: "जब जोखिम और  दुर्बलता  (vulnerability) का मिलन होता है तब दुर्घटनाएं घटती हैं". [2]  जिन इलाकों में दुर्बलताएं निहित न हों वहां पर एक पर भी एक प्राकृतिक आपदा में तब्दील नहीं हो सकता है, उदहारण स्वरुप, निर्जन प्रदेश में एक प्रबल भूकंप का आना-बाना मानव की भागीदारी के घटनाएँ अपने आप जोखिम या आपदा नहीं बनती हैं, इसके फलस्वरूप  प्राकृतिक  शब्द को विवादित बताया गया है ।

पर्यावरण में होने वाले नुकसान केसे बचे।

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पर्यावरण में मुख्य रूप से पेड़ पौधे,जीव जंतु, पशु-पक्षी जल वायु मिट्टी मनुष्य आदि शामिल होते हैं। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर विकास किया जाए तो वह सतत विकास न होकर भावी पीढ़ियों के लिए घातक बन जाता है। जैसे जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण ,मिट्टी प्रदूषण ,ध्वनि प्रदूषण ,मरुस्थलीकरण औद्योगीकरण, नगरीकरण ,वन विनाश करने ग्लोबल वार्मिंग मिट्टी में बढ़ती लवणता क्षारीयता की मात्रा ओजोन परत का क्षरण अम्लीय वर्षा आदि से बचने के लिए अथक प्रयास किए जाने चाहिए। लेकिन ऐसे समाप्त नहीं हो सकता इसे केवल पूर्ण परमात्मा का तत्वज्ञान अमृतवाणी पूरे प्रकृति में फैलने से यह पर्यावरण में होने वाले नुकसान अपने आप समाप्त हो जाते हैं।

हम नास्तिक अच्छे या बुरे

हम नास्तिक अच्छे होते हैं या बुरे, नैतिक होते हैं या अनैतिक, मानवता में यकीन रखते हैं या नहीं आदि पर बात करें, उससे पहले नास्तिक किसे कहते हैं, स्पस्ट करने का प्रयास करते हैं। नास्तिक के बारे में भारत में कई प्रकार की संकल्पनायें अथवा समझ लोगों में है –एक संकल्पना के अनुसार, नास्तिक शब्द दो शब्दों के मेल से बना है – नास्ति + क। 'नास्ति' का अर्थ है कि 'जो नहीं है' और 'क' का अर्थ है 'यकीन करने वाला'। इस तरह से इसका अर्थ हुआ जो यह मानता है कि नहीं है अथवा स्तित्व नहीं है। यहाँ अभिप्राय है, वैसे लोग जो मानते हैं कि इस संसार को चलाने वाला कोई नहीं हैं।  कोई ईश्वर, कोई देवी-देवता आदि नहीं हैं। कोई भी अलौलिक शक्ति नहीं है, जो सृष्टि करती है। उसका सञ्चालन और नियंत्रण करती है।  चूँकि नास्तिक ईश्वर में यकीन नहीं करते, इसलिए इन्हें प्रायः अनीश्वरवादी भी कह दिया जाता है। लेकिन यह नहीं हो सकता है क्योंकि सृष्टि की रचना परमात्मा के अलावा कोई और नहीं कर सकता है क्योंकि सृष्टि की रचना परमात्मा ने की ओर सभी मनुष्यों जीव-जंतु पेड़-पौधे आदि को परमात्मा ने बनाया उसका वेदो...

मांस खाना परमेश्वर का आदेश नहीं !

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मांस खाना परमेश्वर का आदेश नहीं ! पवित्र बाईबल (उत्पत्ति ग्रन्थ 1:29) प्रभु ने मनुष्यों के खाने के लिए जितने बीज वाले छोटे पेड़ तथा जितने पेड़ों में बीज वाले फल होते हैं वे भोजन के लिए प्रदान किए हैं, माँस खाना नहीं कहा है।

सत भक्ति से जाने अद्भुत लाभ

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सत भक्ति से ऐड्स या कैंसर जैसी बीमारी ठीक होती है। वैसे कोरोना वायरस से बचने के लिए सतभक्ति ज़रूरी है।

नशा एक नाश का कारण है।

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नशा चाहे शराब, सुल्फा, अफीम, हिरोईन आदि-आदि किसी का भी करते हो, यह आपका सर्वनाश का कारण बनेगा। इस का किसी भी शास्त्र में उल्लेख नहीं कि नशा करें। यह मानव समाज को बर्बाद कर रहा है।